
प्रवीण शिवशंकर गोन्नाडे की कहानी प्रेरणा और संघर्ष की एक मिसाल है। नागपुर के रहने वाले प्रवीण ने नशे की लत को हराकर और आर्थिक तंगी को पीछे छोड़कर आज चार व्यवसायों के मालिक बन गए हैं। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें शून्य से शिखर तक पहुंचाया और आज वे करोड़ों का कारोबार संभाल रहे हैं।
प्रवीण का परिवार बेहद गरीब था। उनके पिता कताई मिल में काम करते थे, लेकिन मिल बंद होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। पिता ने चूड़ियां बेचने का ठेला शुरू किया और मां भी भारी टोकरी उठाकर घर-घर चूड़ियां बेचने लगीं।
पांच लोगों के परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं था। फिर भी प्रवीण और उनके भाई-बहनों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मेहनत से पढ़ाई की और अपने सपनों को पूरा करने का रास्ता बनाया।
प्रवीण की बड़ी बहन तृषाली पखाले भारतीय रेलवे में कल्याण निरीक्षक हैं और बड़े भाई अनिल गोन्नाडे की अपनी जीआईएस सर्वेक्षण कंपनी है। लेकिन प्रवीण का रास्ता आसान नहीं था। बारवीं के बाद वे गलत संगत में पड़ गए और शराब-सिगरेट की लत में फंस गए। उनकी बहन तृषाली ने उन्हें इस दलदल से निकाला और एक नई शुरुआत करने में मदद की।
प्रवीण ने बी.कॉम (कंप्यूटर एप्लीकेशन) और नेचुरोपैथी में डिप्लोमा किया। पढ़ाई के दौरान वे ट्यूशन पढ़ाते थे, लेकिन असली बदलाव तब आया जब २०१० में उन्होंने नासिक की ‘चैतन्य फार्मा’ कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम शुरू किया।
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वहां कंपनी के प्रबंध निदेशक पुष्कर पाठक और वरिष्ठ योगेश राउत ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। दस साल की मेहनत के बाद प्रवीण ने नौकरी छोड़कर अपना व्यवसाय शुरू किया।
आज प्रवीण की चार कंपनियां हैं :
- मावेन एजेंसी : आयुर्वेदिक दवाओं का वितरण।
- मावेन आयुर्वेदिक औषधालय : आयुर्वेदिक दवाओं की दुकान, जहां नागपुर के प्रसिद्ध डॉ. वैद्य रचनील कमावीसदार की ओपीडी चलती है।
- मावेन हर्बल्स : आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण, जिसमें ‘अश्वजीत एम टैबलेट’ (सामान्य और यौन कमजोरी), ‘ऑर्थोवेन एम’ (गठिया), और ‘काउली डीएम टैबलेट’ (मधुमेह) जैसे उत्पाद शामिल हैं।
- मावेन डायग्नोस्टिक सेंटर : पैथोलॉजी सेवाएं।
इन व्यवसायों में १५० लोग काम करते हैं। प्रवीण की पत्नी समीक्षा ‘मावेन फार्मेसी’ को संभालती हैं और उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके दोस्त हर्षल संचेती, प्रतीक बोकड़े और सहकर्मी पूनम सोलंकी ने भी उनकी इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रवीण का लक्ष्य आयुर्वेद को बढ़ावा देना और इसे आम लोगों तक पहुंचाना है। वे स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर आयुर्वेद के बारे में जागरूकता फैलाने की योजना बना रहे हैं। उनकी कंपनी डिजिटल मार्केटिंग और वेबसाइट के जरिए भी अपने उत्पादों को विश्व स्तर पर ले जाना चाहती है।
कोरोना काल में भी प्रवीण ने ग्रामीण क्षेत्रों में दवाएं पहुंचाईं और उचित मूल्य पर लोगों की मदद की। उनकी ईमानदारी, अनुशासन और प्रतिबद्धता उनकी सफलता का आधार है।
प्रवीण की कहानी सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी यह यात्रा हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को सच करना चाहता है।
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