
रॉबर्ट कियोसाकी की पुस्तक ‘रिच डैड पुअर डैड’ में यह विचार प्रभावशाली है : “गरीब लोग कुछ नहीं खरीदते, अमीर लोग संपत्तियाँ खरीदते हैं और मध्यम वर्ग दायित्व खरीदता है, यह सोचकर कि वे संपत्तियाँ हैं।” १ अप्रैल २००० को प्रकाशित यह पुस्तक वित्तीय साक्षरता के महत्व को उजागर करती है।
यह पुस्तक दो पिताओं एक अमीर और एक गरीब के वित्तीय दृष्टिकोणों की तुलना करती है। यह सिखाती है :
- धन कैसे कमाएँ और प्रबंधन करें।
- पैसा कहाँ निवेश करें और बचत करें।
- वित्तीय रूप से समझदारी भरे निर्णय कैसे लें।
स्कूल ऐसी शिक्षा नहीं देते। लोग अक्सर बड़ा घर या कार को निवेश समझते हैं, लेकिन यह पुस्तक इस भ्रम को तोड़ती है।
स्कूल धन कमाना नहीं सिखाते : शिक्षा नौकरी के लिए है, वित्तीय प्रबंधन के लिए नहीं।
धन सृजन : संपत्तियाँ बढ़ाएँ, दायित्व कम करें।
व्यवसाय या निवेश : नौकरी के बजाय स्वयं का व्यवसाय शुरू करें।
वित्तीय शिक्षा : सफलता के लिए आवश्यक।
पैसे को काम करने दें : पैसा आपके लिए आय उत्पन्न करे।
रॉबर्ट बताते हैं कि वित्तीय समस्याओं का समाधान हमारी बुद्धिमत्ता है। अमीर लोग आय देने वाली संपत्तियाँ खरीदते हैं, जबकि गरीब लोग खर्च बढ़ाने वाले दायित्व खरीदते हैं। परिवार का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है अमीर पिता धन प्रबंधन सिखाते हैं, जबकि गरीब पिता सीमित ज्ञान दे पाते हैं।
यह पुस्तक अमीर और गरीब के पैसे के उपयोग के अंतर को स्पष्ट करती है। यह व्यावहारिक सुझाव देती है जिनसे पाठक धन की ओर बढ़ सकते हैं। विभिन्न भाषाओं में अनुवादित यह पुस्तक सभी किताब दुकानों और ऑनलाइन उपलब्ध है।
रिच डैड पुअर डैड केवल धन कमाने की किताब नहीं, बल्कि वित्तीय सोच को बदलने का उपकरण है। यह युवाओं और सभी के लिए प्रेरणादायक है जो वित्तीय स्वतंत्रता चाहते हैं।