गेमिंग स्टार्टअप ‘मेटाशॉट’ को कर्नाटक सरकार के वेंचर फंड से मिला २ करोड़ का फंडिंग

gaming startup metashot gets rs 2 crore funding from karnataka governments venture fund

बेंगलुरु स्थित कंसोल गेमिंग स्टार्टअप ‘गिल्लीडंडा टेक प्राइवेट लिमिटेड’ जिसे इसके फ्लैगशिप ब्रांड ‘मेटाशॉट’ के लिए जाना जाता है उसे कर्नाटक सरकार के वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) KITVEN फंड (कर्नाटक सूचना प्रौद्योगिकी वेंचर कैपिटल फंड) से परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से २ करोड़ रुपये का फंडिंग मिला हैं। इस पूंजी का उपयोग कंपनी के विकास को गति देने और बाजार विस्तार के लिए किया जाएगा।

२०२१ में प्रिंस थॉमस, रंजीत कुमार बेहरा और अजित सनी द्वारा स्थापित ‘मेटाशॉट’ अपनी स्वदेशी तकनीक के माध्यम से व्यापक दर्शकों को कंसोल जैसा अनुभव प्रदान करता है, जो वर्तमान में पेटेंट के लिए लंबित है।

इसका प्रमुख उत्पाद, ‘मेटाशॉट स्मार्ट बैट’ वास्तविक समय में क्रिकेट शॉट्स को ट्रैक करता है और उन्हें मेटाशॉट ऐप में गेमप्ले के साथ सहजता से एकीकृत करता है। स्टार्टअप का दीर्घकालिक दृष्टिकोण विभिन्न खेल-आधारित खेलों में भौतिक और आभासी खेल को मिश्रित करने वाला एक मंच विकसित करना है।

इससे पहले जनवरी २०२५ में स्टार्टअप ने सॉस.वीसी (Sauce.VC) के नेतृत्व में इक्विटी और ऋण के संयोजन में ११ करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसमें शार्प वेंचर्स और पैंथेरा पीक कैपिटल ने भी हिस्सा लिया था। उस दौर से पहले २०२३ में ‘मेटाशॉट’ ने इन्फ्लेक्शन पॉइंट वेंचर्स के नेतृत्व में प्री-सीड फंडिंग राउंड में ४ लाख डॉलर जुटाए थे, जिसमें एक प्रारंभिक चरण के गेमिंग केंद्रित फंड और प्रमुख एंजल निवेशकों ने भाग लिया था।

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KITVEN के सीईओ पी. वी. हरिकृष्णन ने कहा, “’मेटाशॉट’ कर्नाटक के समृद्ध स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र से उभरने वाली नवाचार और गुणवत्ता का प्रतीक है। पूरी तरह से भारत में निर्मित उत्पाद और बेंगलुरु में स्थानीय विनिर्माण और असेंबली के साथ ‘मेटाशॉट’ अपनी गुणवत्ता के लिए अलग है। KITVEN में हम उनके साथ साझेदारी करने और इस नवाचार को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए उत्साहित हैं।”

२० करोड़ रुपये के कोष के साथ KITVEN 4 AVGC, एक AIF, कर्नाटक राज्य में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स (AVGC) क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही कंपनियों में निवेश पर ध्यान केंद्रित करता है। इस कोष की शुरुआत कर्नाटक सरकार के आईटी, बीटी और विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा की गई है, जिसमें अन्य राज्य सरकार की कंपनियों/संस्थानों की भागीदारी है।

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