बेंगलुरु में बिल्डरों और व्यापारियों के संगम में राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रगति पर जोर

बेंगलुरु : बेंगलुरु में आयोजित बिल्डरों और व्यापारियों के एक महत्वपूर्ण संगम में, राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति और तकनीकी नवाचार पर गहन विचार-मंथन हुआ। इस अवसर पर वक्ता ने पहले पहलगाम में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के प्रति संवेदना व्यक्त की, शोक संतप्त परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

उन्होंने कहा कि पहलगाम में क्रूरता और बर्बरता की घटना ने राष्ट्र को पीड़ा दी, लेकिन भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए अपनी ताकत का परिचय दिया। मुरीदके और बहावलपुर में सटीक कार्रवाई से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों को ध्वस्त कर दिया गया। वक्ता ने कहा, “भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ब्रह्मोस मिसाइल की शक्ति हमारी तकनीकी ताकत का प्रतीक है।”

बेंगलुरु को तकनीकी नवाचार का केंद्र बताते हुए, वक्ता ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन जैसी विघटनकारी तकनीकें नई चुनौतियाँ और अवसर ला रही हैं। उन्होंने कॉरपोरेट्स, व्यवसायों और उद्योगों से अनुसंधान में निवेश करने और तकनीकी कौशल को बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर शक्तिशाली और सुरक्षित बन सके।

आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व विकास किया है और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। हालांकि, प्रति व्यक्ति आय में आठ गुना वृद्धि की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने उद्योग जगत से ग्रीन फील्ड परियोजनाओं को बढ़ावा देने, रोजगार सृजन करने और कृषि क्षेत्र के साथ तालमेल बिठाने की अपील की।

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वक्ता ने कहा, “किसानों का हाथ थामें, खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर ध्यान दें। टमाटरों को सड़कों पर फेंकना हमारी राष्ट्रीय मानसिकता के लिए ठीक नहीं। मोबाइल औद्योगिक इकाइयों के जरिए अधिशेष उत्पादन को कच्चे माल में बदला जा सकता है।”

आर्थिक राष्ट्रवाद की वकालत करते हुए, उन्होंने स्वदेशी को अपनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आयात कम करने से विदेशी मुद्रा भंडार को ८०० बिलियन डॉलर तक ले जाया जा सकता है।

राजनीतिक दलों से संवाद और सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए, वक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के मुद्दों को दलीय दृष्टिकोण से ऊपर उठकर देखना होगा। उन्होंने सार्वजनिक व्यवस्था को चुनौती देने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

अंत में, वक्ता ने युवाओं से स्टार्ट-अप शुरू करने और उद्यमिता को अपनाने का आह्वान किया, ताकि भारत को वैश्विक निवेश और अवसरों का केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने बेंगलुरु को प्रतिभा और नवाचार का गढ़ बताते हुए, इसे वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने की कुंजी बताया।

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